श्रीउपदेशामृत: - Sri Upadeshamrita By Srila Rupa Goswami with acaryas Commentary
Sri Upadeamrta (The Nectar of Instruction), composed by Srila Rupa Gosvami, is a foundational Gaudiya Vaishnava text offering clear and practical guidance on the principles of pure bhakti. This edition presents the original Sanskrit verses along with authoritative commentaries by great Gaudiya acharyas, making it an essential handbook for sincere spiritual practitioners and students of devotional philosophy.
श्रीउपदेशामृत गौड़ीय वैष्णव परंपरा का एक अत्यंत प्रामाणिक एवं सारगर्भित ग्रंथ है, जिसकी रचना श्रील रूप गोस्वामी ने की है। यह ग्रंथ भक्तियोग के साधक के लिए आचार, विचार और व्यवहार—तीनों का स्पष्ट मार्गदर्शन प्रदान करता है।
इस विशेष संस्करण में केवल मूल श्लोक ही नहीं, बल्कि उनके गूढ़ अर्थों को समझाने के लिए अनेक महान आचार्यों की टीकाएँ और व्याख्याएँ सम्मिलित की गई हैं, जिससे यह ग्रंथ साधक एवं विद्वान—दोनों के लिए अत्यंत उपयोगी बन जाता है।
इस संस्करण की विशेषताएँ
मूल संस्कृत श्लोक
अन्वय एवं श्लोकार्थ
श्रील राधारमणदास गोस्वामी कृत श्रीउपदेश-प्रकाशिका टीका
श्रील भक्तिविनोद ठाकुर कृत पीयूषवर्षिणी-वृत्ति
श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती गोस्वामी प्रभुपाद कृत अनुपूरक अनुवृत्ति
सुव्यवस्थित संपादन एवं प्रामाणिक पाठ
आध्यात्मिक महत्व
श्रीउपदेशामृत भक्त के जीवन में आने वाली बाधाओं, वैष्णव आचार, साधना-सिद्धांत, तथा शुद्ध भक्ति के विकास को अत्यंत स्पष्ट एवं व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत करता है। यह ग्रंथ विशेष रूप से उन साधकों के लिए अमूल्य है जो रागानुगा भक्ति एवं शुद्ध गौड़ीय सिद्धांत को समझना चाहते हैं।
गौड़ीय वैष्णव साधक
भागवत, भक्ति-शास्त्र एवं वैदिक दर्शन के विद्यार्थी
संन्यासी, ब्रह्मचारी एवं गृहस्थ भक्त
आध्यात्मिक ग्रंथों के गंभीर पाठक एवं शोधार्थी





















