उज्ज्वलनीलमणि किरण: Ujjavala Nilamani Kiran – Hindi
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Ujjvala Nilamani Kiran by Srila Visvanatha Chakravarti Thakura presents the essential teachings of Srila Rupa Gosvami’s Ujjvala Nilamani in a concise and accessible form. It explains key aspects of madhurya-rasa, including Sri Krishna as the supreme hero, the gopis, sakhis, vibhavas, anubhavas, devotional emotions, madhurya-rati, and the moods of union and separation. Translated, edited, and accompanied by commentary by Srimad Bhaktivedanta Narayana Gosvami Maharaja, this book is a valuable introduction to Gaudiya Vaishnava rasa-tattva.
श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर द्वारा रचित • श्रीमद्भक्तिवेदान्त नारायण गोस्वामी महाराज द्वारा अनुवादित, संपादित एवं टीकायुक्त
उज्ज्वलनीलमणि किरण श्रीगौड़ीय वैष्णवाचार्य मुकुटमणि श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर का एक संक्षिप्त किन्तु अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ है। इसमें श्रील रूप गोस्वामी द्वारा रचित उज्ज्वलनीलमणि का सार-निर्यास अत्यंत सरल, सहज और बोधगम्य संस्कृत भाषा में प्रस्तुत किया गया है। जिस प्रकार एक छोटे पात्र में विशाल समुद्र को समाहित करने का प्रयास किया जाए, उसी प्रकार इस ग्रंथ में उज्ज्वलनीलमणि के गहन रस-तत्व को संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत किया गया है।
श्रील रूप गोस्वामी, श्रीचैतन्य महाप्रभु के अत्यंत प्रिय पार्षद एवं उनके मनोऽभीष्ट को इस संसार में स्थापित करने वाले प्रमुख आचार्य हैं। उन्होंने उज्ज्वलनीलमणि में व्रजराज श्रीनन्दनन्दन श्रीकृष्ण के उज्ज्वल मधुर रस का अत्यंत गहन एवं वैज्ञानिक विवेचन किया है। श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर ने इसी महान ग्रंथ के प्रमुख सिद्धांतों और रस-तत्वों का सार इस कृति में प्रस्तुत किया है।
ग्रंथ में उज्ज्वल रस के विषयालम्बन नायक-चूड़ामणि श्रीकृष्ण, आश्रयालम्बन नायिकाओं, उनके स्वभाव, दूतियों, विभिन्न प्रकार की सखियों, वयकाल, उद्दीपन विभाव, अनुभाव, सात्त्विक भाव, भावोत्पत्ति, स्थायीभाव तथा मधुरारति के आश्रय आदि का संक्षिप्त एवं व्यवस्थित विवेचन मिलता है। साथ ही श्रृंगार रस के अंतर्गत संयोग और विप्रलम्भ जैसे महत्वपूर्ण विषयों का भी परिचय दिया गया है।
यह संस्करण श्रीमद्भक्तिवेदान्त नारायण गोस्वामी महाराज द्वारा अनुवादित, संपादित एवं टीकायुक्त है, जिससे पाठकों को श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर की प्रस्तुति को समझने में अतिरिक्त सहायता मिलती है।
प्रमुख विषय
श्रीकृष्ण — उज्ज्वल रस के नायक-चूड़ामणि
आश्रयालम्बन नायिकाएं
नायिकाओं के स्वभाव एवं भेद
दूतियों का परिचय
पंचविध सखियां
विभिन्न वयकाल
उद्दीपन विभाव
अनुभाव एवं सात्त्विक भाव
भावोत्पत्ति
स्थायीभाव एवं मधुरारति
श्रृंगार रस
संयोग एवं विप्रलम्भ
पुस्तक विवरण
लेखक: श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर
अनुवाद, संपादन एवं टीका: श्रीमद्भक्तिवेदान्त नारायण गोस्वामी महाराज
Publisher: Gaudiya Vedanta Prakashan
Edition: Second Edition, 2006
Binding: Paperback
Language: Hindi
उज्ज्वलनीलमणि किरण श्रील रूप गोस्वामी के उज्ज्वलनीलमणि में वर्णित मधुर रस के प्रमुख सिद्धांतों को संक्षिप्त रूप में समझने के इच्छुक पाठकों के लिए एक उपयोगी ग्रंथ है। यह विशेष रूप से गौड़ीय वैष्णव दर्शन, भक्तिरस-तत्व और श्री श्री राधा-कृष्ण की माधुर्य-लीला का अध्ययन करने वाले गंभीर साधकों और विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है।

















