Gokul Lila (Hindi) Jankinath Das
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माता यशोदा की वात्सल्य प्रेम की अद्वितीय स्थिति के लिए प्रशंसा की जाती है, क्योंकि वह अपने प्राण प्यारे बालकृष्ण के रूप में सर्वशक्तिमान भगवान् को भी निर्यात्रत कर सकती हैं। प्रत्येक साधक को यह विशेषाधिकार मिल सकता है। यदि आप श्रीकृष्ण को अपने पुत्र के रूप में प्रेम करते हैं, तो आपको भी ऐसा विशेषाधिकार प्राप्त होगा।"
(श्रील प्रभुपाद, श्रीमद् भागवतम् 1.8.31 प्रवचन, लॉस एंजिल्स 1973)
"नंद महाराज और माता यशोदा वात्सल्य प्रेम के प्रतीक हैं। यदि कोई उनके अनुगत होकर श्रीकृष्ण की सेवा करे तब वह भी नंद महाराज और यशोदा माता के जैसा बन सकता है।"
(श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर)
"तुम्हें यह दुर्लभ मानव शरीर प्राप्त हुआ है। क्या आपको इस उपहार की चिंता नहीं है? यदि तुम यशोदानंदन की पूजा नहीं करते हो, तब मृत्यु के समय विशाल दुःख तुम्हारी प्रतीक्षा करेगा। सूर्य के उदय और अस्त होने पर प्रत्येक दिन समाप्त हो जाता है। फिर वह कभी भी लौट कर नहीं आता है। आप सुहृद श्रीकृष्ण की सेवा किये बिना निष्क्रिय क्यों हो?"
(अरुणोदय-कीर्तन, श्रील भक्तिविनोद ठाकुर

















