Sri Ascharya Ras Prabandha
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परम रसिक श्रील श्रीप्रबोधानन्द सरस्वतिपाद गौड़ीय सम्प्रदाय के एक उज्ज्वल नक्षत्र हैं। अपनी देदीप्यमान आभा से इन्होंने समस्त वैष्णव जगत् को प्रकाशित किया है। श्रीप्रबोधानन्द सरस्वती पूर्व में एक संन्यासी थे। नाम था 'प्रकाशानन्द'। काशी में श्रीमन्महाप्रभु चैतन्यदेव की अनपायिनी कृपा से शुष्क मायावाद से निकलकर श्रीकृष्ण-प्रेम-सरिता में जब अवगाहन किया तो प्रतिक्षण वर्धित आनन्द के प्रबोध से नाम हुआ 'प्रबोधानन्द
श्रीरासलीला का दिव्य प्रकरण श्रीमद्भागवत के रासपंचाध्यायी में सभी लोग आनन्दपूर्वक श्रवण करते हैं। उसी लीला का अन्तश्चिन्तित देह में श्रीसरस्वतिपाद ने दर्शन किया और उसे लिपिबद्ध किया 'आश्चर्य रास प्रबन्ध' के नाम से। यह परकीया भावमयी एक उत्कृष्ट रचना है जो रागानुगा भाव के परिपक्व साधकों के लिए है, जनसामान्य का इसमें अधिकार नहीं है।
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