Sri Stavavali and Sri Danakeli Chintamani (Hindi)
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श्री श्रीमद् गौड़ीय वैष्णव आचार्य प्रवर श्रील श्रीरघुनाथदास गोस्यामिपाट विरचित ग्रन्यद्वय
श्रीश्री श्तवावली
श्री श्रीदानकर्काल चिन्तार्माण
दासामास डॉ गिरिराज
श्री स्तवावली एवं श्री दानकेलि चिन्तामणि
श्री श्रीमद् गौड़ीय वैष्णव आचार्य प्रवर श्रील श्रीरघुनाथदास गोस्वामीपाद द्वारा विरचित
हिंदी अनुवाद व संपादन: दासानुदास डॉ. गिरिराज
यह ग्रंथ-द्वय गौड़ीय वैष्णव भक्ति-साहित्य की अमूल्य निधि है। इसमें श्रील रघुनाथदास गोस्वामी के हृदय-स्पर्शी स्तोत्रों और माधुर्य-रस से परिपूर्ण लीलाओं का गहन दर्शन प्राप्त होता है।
श्री स्तवावली:
श्री राधा-कृष्ण की दिव्य लीलाओं, विरह-वेदना, दैन्यभाव और परम भक्ति का अनुपम संग्रह। ये स्तोत्र साधक के हृदय में वैराग्य, विनय और प्रेम-भक्ति का संचार करते हैं।
श्री दानकेलि चिन्तामणि:
व्रज की मधुर दान-केलि लीलाओं का रसपूर्ण वर्णन, जहाँ श्री राधा-कृष्ण के प्रेम-संवाद, हास्य, अनुराग और अलौकिक माधुर्य का अत्यंत सुंदर चित्रण मिलता है।
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