श्रीश्रीबृहद्भागवतामृतम् (Brihad Bhagavatamritam) By Srila Sanatana Goswami
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श्रीश्रीबृहद्भागवतामृतम्' गौड़ीय वैष्णव सम्प्रदाय के सबसे महत्वपूर्ण और पूजनीय ग्रन्थों में से एक है। इसे स्वयं श्री चैतन्य महाप्रभु के प्रत्यक्ष शिष्य और वृन्दावन के षण्गोस्वामियों में से एक, श्रील सनातन गोस्वामीपाद ने रचा है। यह ग्रन्थ केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि भक्ति का एक महासागर है, जिसे श्रीमद्भागवतम् का साक्षात् अर्क (सार) माना जाता है।
विषय वस्तु:
यह ग्रन्थ मुख्य रूप से दो भागों (खण्डों) में विभाजित है:
पूर्व खण्ड (पहला भाग): इसमें नारद मुनि एक आदर्श भक्त की खोज में विभिन्न लोकों (पृथ्वी से लेकर वैकुण्ठ तक) की यात्रा करते हैं। इसके माध्यम से भक्तों की क्रमिक श्रेणियाँ और भक्ति के विभिन्न स्तरों का अद्भुत विश्लेषण किया गया है।
उत्तर खण्ड (दूसरा भाग): यह भाग गोपकुमार की दिव्य यात्रा का वर्णन करता है, जो भगवद्-धाम के सर्वोच्च स्तर, गोलोक वृन्दावन की प्राप्ति तक की उनकी पारमार्थिक यात्रा को दर्शाता है। यह खण्ड भगवद्-सेवा की सर्वोच्चता और वृन्दावन के माधुर्य भाव को स्थापित करता है।
यह संस्करण विशेष क्यों है? (गौड़ीय वेदान्त प्रकाशन):
प्रस्तुत संस्करण गौड़ीय वेदान्त प्रकाशन द्वारा प्रकाशित
मजबूत और सुंदर 'हार्डबाउंड' (Hardbound)
भाषा: हिंदी (मूल संस्कृत श्लोकों के साथ)





















