Sri Bhaktamal with Bhaktisabodhini Commentary by Sri Priyadas Ji – Hindi
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Sri Bhaktamal is a classic devotional work describing the lives and spiritual glories of great Vaishnava saints and devotees. This edition includes the famous Bhaktisabodhini commentary by Sri Priyadas Ji, with detailed Hindi explanations that help readers understand the devotional teachings and historical accounts of the Bhakti tradition. Published by Gita Press, Gorakhpur, this large-size hardcover edition is ideal for study, reference, and devotional reading.
श्रीप्रियादासजीकृत भक्तिसबोधिनी टीका सहित
भाषा: हिन्दी
आकार: ग्रन्थाकार (Large Size)
“श्रीभक्तमाल” वैष्णव भक्ति परम्परा का एक अत्यंत प्रसिद्ध और प्रेरणादायक ग्रंथ है, जिसमें भारत की संत परम्परा के महान भक्तों के जीवन, उनकी भक्ति, त्याग और भगवान के प्रति अटूट प्रेम का वर्णन किया गया है। यह मूलतः संत नाभादास जी द्वारा रचित भक्तमाल पर आधारित है, जिसमें विभिन्न कालों के महान वैष्णव संतों और भक्तों का संक्षिप्त जीवन परिचय एवं उनकी आध्यात्मिक महिमा का वर्णन मिलता है।
इस संस्करण में श्रीप्रियादास जी की प्रसिद्ध “भक्तिसबोधिनी टीका” सहित विस्तृत हिन्दी व्याख्या दी गई है, जो मूल ग्रंथ के गूढ़ भावों को सरल एवं स्पष्ट रूप में समझने में सहायता करती है। टीका के माध्यम से पाठक भक्तों की लीलाओं, उनके आध्यात्मिक आदर्शों तथा भक्ति मार्ग के सिद्धांतों को गहराई से समझ सकते हैं।
इस ग्रंथ में संतों और भक्तों की कथाएँ केवल ऐतिहासिक विवरण नहीं हैं, बल्कि वे भक्ति, श्रद्धा, समर्पण और भगवान के नाम-स्मरण की महिमा को हृदय में जागृत करती हैं। इसलिए “श्रीभक्तमाल” वैष्णव भक्तों, साधकों तथा संत साहित्य के अध्ययन करने वाले पाठकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ माना जाता है।
गीताप्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित यह ग्रन्थाकार हार्डकवर संस्करण सुन्दर मुद्रण, स्पष्ट अक्षरों और दीर्घकाल तक सुरक्षित रहने वाली मजबूत बाइंडिंग के साथ उपलब्ध है, जिससे यह अध्ययन और संग्रह दोनों के लिए उपयुक्त है।
मुख्य विशेषताएँ
• संत नाभादास जी कृत प्रसिद्ध वैष्णव ग्रंथ
• श्रीप्रियादास जी की “भक्तिसबोधिनी टीका” सहित
• विस्तृत हिन्दी व्याख्या
• वैष्णव संतों और भक्तों के जीवन चरित्र
• ग्रन्थाकार (Large Size) सुन्दर हार्डकवर संस्करण
• गीताप्रेस, गोरखपुर का प्रामाणिक प्रकाशन
यह ग्रंथ संत परम्परा की गौरवशाली भक्ति धारा को समझने तथा महान भक्तों के आदर्श जीवन से प्रेरणा प्राप्त करने के लिए अत्यंत उपयोगी है।

















