ब्रज-लीला की अपूर्ण तीन वाञ्छाएँ - Braj Lila ki Apurna Teen Banchhayen
The Three Unfulfilled Longings of Braja-līlā is a deeply contemplative Vaiṣṇava work that reveals subtle devotional truths hidden within the divine pastimes of Śrī Kṛṣṇa in Braja. Although the Lord’s līlās appear complete and perfect, this book explains how certain longings remain intentionally “unfulfilled” in order to intensify the sweetness of divine love and deepen the devotee’s experience of bhakti-rasa.
ब्रज-भक्ति की गूढ़ भावनाओं पर आधारित एक विशिष्ट कृति
ब्रज-लीला की अपूर्ण तीन वाञ्छाएँ ब्रज की दिव्य लीलाओं में निहित उन सूक्ष्म भावनात्मक इच्छाओं का रसपूर्ण विवेचन प्रस्तुत करती है, जो बाह्य दृष्टि से पूर्ण प्रतीत होते हुए भी भक्ति-रस के उच्च स्तर पर “अपूर्ण” मानी जाती हैं। यह ग्रंथ ब्रज-भाव, माधुर्य-रस और शुद्ध प्रेम-भक्ति के अत्यंत गहरे रहस्यों को उजागर करता है।
पुस्तक में यह दर्शाया गया है कि किस प्रकार भगवान की लीलाओं में भी भक्त-भाव की उत्कटता से कुछ वाञ्छाएँ जानबूझकर अपूर्ण रहती हैं, जिससे प्रेम की तीव्रता और माधुर्य अनंत रूप से बढ़ता है। यह विषय साधारण नहीं, बल्कि गंभीर साधकों और ब्रज-रस के जिज्ञासुओं के लिए विशेष महत्व रखता है।
Language - Hindi
Format - Paperback





















