श्री चैतन्य भागवत (हिंदी अनुवाद) मूल ग्रंथकर्ता: श्रील वृन्दावन दास ठाकुर
Shri Chaitanya Bhagavata is one of the most authoritative and devotion-filled texts of the Gaudiya Vaishnava tradition, revered as the auspicious introduction to the pastimes of Sri Chaitanya Mahaprabhu.
This complete Hindi edition, translated by Shyamdas (Shri Shyam Lal Hakim), presents Mahaprabhu’s avatar-tattva, childhood, Navadvipa pastimes, and the spread of nama-sankirtana in a simple, flowing, and deeply devotional language.
Covering the Adi, Madhya, and Antya sections, this Vrindavan-published edition is ideal for devotees, practitioners, and readers seeking an authentic understanding of Chaitanya-lila and Gaudiya Vaishnava philosophy.
श्री श्री चैतन्य भागवत गौड़ीय वैष्णव परंपरा का एक अत्यंत प्रामाणिक एवं भक्तिरस से परिपूर्ण ग्रंथ है। इसे चैतन्य लीला का मंगलाचरण कहा जाता है। इस महान ग्रंथ में श्री चैतन्य महाप्रभु के अवतार-तत्त्व, बाल्यकाल, नवद्वीप लीलाएँ, नाम-संकीर्तन का प्रचार तथा भक्तों के साथ उनकी करुणामयी लीलाओं का विस्तार से वर्णन मिलता है।
ब्रज विभूति श्री श्यामदास जी द्वारा किया गया यह हिंदी अनुवाद सरल, भावपूर्ण एवं श्रद्धा से परिपूर्ण है, जिससे सामान्य पाठक भी श्री चैतन्य महाप्रभु की लीलाओं का रसास्वादन सहजता से कर सकता है। यह संस्करण आदि, मध्य और अंत्य खंडों सहित संपूर्ण ग्रंथ को समाहित करता है।
मुख्य विशेषताएँ:
श्री चैतन्य महाप्रभु की प्रारंभिक एवं संकीर्तन लीलाओं का प्रमाणिक वर्णन
शुद्ध गौड़ीय वैष्णव सिद्धांतों पर आधारित
सरल, प्रवाहयुक्त एवं भक्तिमय हिंदी अनुवाद
साधकों, भक्तों और वैष्णव साहित्य के पाठकों के लिए अत्यंत उपयोगी
वृन्दावन परंपरा से प्रकाशित विश्वसनीय संस्करण
उपयुक्त:
मूल ग्रंथकर्ता: श्रील वृन्दावन दास ठाकुर
हिंदी अनुवाद: ब्रज विभूति श्री श्यामदास (श्री श्याम लाल हकीम)
प्रकाशक: श्री हरिनाम संकीर्तन मण्डल, श्रीधाम वृन्दावन
नाम-संकीर्तन, भक्ति-साधना, श्री चैतन्य महाप्रभु के जीवन एवं गौड़ीय वैष्णव दर्शन को समझने के इच्छुक पाठकों के लिए यह ग्रंथ अत्यंत अनिवार्य है।





















