श्री श्री गोपालचम्पू- (Shri Shri Gopal Champu) By Srila Jiva Goswami (Hindi)
लेखक: श्रील जीव गोस्वामी
हिंदी अनुवाद: ब्रज विभूति श्री श्यामलाल हाकिम (श्री श्यामदास)
श्रीश्री गोपालचम्पू गौड़ीय वैष्णव परंपरा का एक अद्वितीय और अत्यंत मधुर काव्यग्रंथ है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य बाल एवं किशोर लीलाओं का अत्यंत रसपूर्ण, भावपूर्ण और शास्त्रीय वर्णन किया गया है। इस महाकाव्य की रचना श्रील जीव गोस्वामी ने संस्कृत में की है, जो भक्ति-रस, दर्शन और काव्य — तीनों का सुंदर संगम है।
इस ग्रंथ में श्रीकृष्ण के जन्म, बाल्यकाल, वृंदावन की लीलाएँ, गोपियों का प्रेम, यमुना, वन, पर्वत, व्रजवासियों का भाव — सब कुछ अत्यंत सूक्ष्म भावनात्मकता और शास्त्रीय प्रामाणिकता के साथ प्रस्तुत किया गया है। यह केवल कथा नहीं है, बल्कि शुद्ध भक्ति (शुद्ध प्रेम) का जीवंत चित्रण है।
ब्रज विभूति श्री श्यामलाल हाकिम (श्री श्यामदास) द्वारा किया गया यह हिंदी अनुवाद अत्यंत सरल, भावपूर्ण और पाठक के हृदय को स्पर्श करने वाला है, जिससे यह दुर्लभ ग्रंथ हिंदी पाठकों के लिए सहज रूप से सुलभ हो गया है।
✨ विशेषताएँ:
गौड़ीय वैष्णव दर्शन का उच्च कोटि का काव्यात्मक ग्रंथ
श्रीकृष्ण की व्रज लीलाओं का अत्यंत मधुर एवं भावपूर्ण वर्णन
मूल संस्कृत ग्रंथ का प्रामाणिक हिंदी अनुवाद
भक्ति, रस, काव्य और दर्शन का सुंदर समन्वय
साधकों, भक्तों, रसिक पाठकों और शोधकर्ताओं — सभी के लिए उपयोगी
श्रीश्री गोपालचम्पू उन पाठकों के लिए अनिवार्य ग्रंथ है जो श्रीकृष्ण की लीलाओं को केवल जानना नहीं, बल्कि हृदय से अनुभव करना चाहते हैं।





















