श्रीश्रीविलापकुसुमाञ्जलि [Sri Vilapa Kusumanjali] by Srimat Ananta Das Babaji
Add More, Save More
श्रीश्री विलापकुसुमाञ्जलिः (प्रार्थना-स्तोत्रम्)
विरचित: श्रीश्रील रघुनाथदास गोस्वामिपाद
बंगला टीका एवं सम्पादन: श्रीमत् अनन्तदास बाबाजी महाराज, राधाकुण्ड
हिंदी रूपान्तर: ब्रजगोपाल दास अग्रवाल
गौड़ीय वैष्णव साधना-पथ के रत्नों में से एक, श्री श्री विलापकुसुमाञ्जलि राधारानी के प्रति श्रील रघुनाथदास गोस्वामी की गहन तड़प और अंतरंग सेवाभाव का अमूल्य संकलन है। यह स्तोत्र साधक के हृदय में सेवा-व्रति जीवन और रागानुगा भक्ति की मधुरता को प्रज्वलित करता है।
श्रीमत् अनन्तदास बाबाजी महाराज की भावपूर्ण बंगला टीका इस ग्रंथ के प्रत्येक श्लोक को जीवंत बनाती है, जबकि ब्रजगोपाल दास अग्रवाल का सरल और प्रवाहपूर्ण हिंदी अनुवाद इसे हर स्तर के पाठकों के लिए सुलभ बनाता है।
भाषा: हिंदी
बाइंडिंग: हार्डकवर
यह ग्रंथ उन साधकों के लिए अनिवार्य है जो राधा-कृष्ण की अंतरंग लीलाओं के भाव-रस में डूबना चाहते हैं।

![श्रीश्रीविलापकुसुमाञ्जलि [Sri Vilapa Kusumanjali] by Srimat Ananta Das Babaji](https://static.wixstatic.com/media/f5adcc_8a3644c84550446e981b434420f47394~mv2.jpg/v1/fill/w_480,h_628,al_c,q_80,enc_avif,quality_auto/f5adcc_8a3644c84550446e981b434420f47394~mv2.jpg)















