श्री भक्ति संदर्भ- Sri Bhakti Sandarbha With Sanskrit Slokas & Hindi Translation
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Sri Bhakti Sandarbha is the fifth book of the celebrated Sat Sandarbha by Srila Jiva Gosvami. This edition presents the original Sanskrit slokas along with clear Hindi translation, edited by Sri Haridas Shastri Ji Maharaja. It establishes pure bhakti as the highest spiritual goal and is essential for serious students of Gaudiya Vaishnava philosophy.
श्री भक्ति संदर्भ श्रील जीव गोस्वामी द्वारा रचित षट् संदर्भ का पंचम ग्रंथ है और गौड़ीय वैष्णव दर्शन का सबसे महत्वपूर्ण तात्त्विक ग्रंथ माना जाता है। इस ग्रंथ में भक्ति के स्वरूप उसकी परिभाषा उसके लक्षण उसके साधन और साध्य स्वरूप तथा कर्म और ज्ञान की अपेक्षा उसकी श्रेष्ठता का अत्यंत गूढ़ और क्रमबद्ध विवेचन किया गया है।
श्रील जीव गोस्वामी ने इस ग्रंथ में प्रमाण सहित यह सिद्ध किया है कि शुद्ध भक्ति ही भगवान श्रीकृष्ण की प्राप्ति का एकमात्र साधन और परम लक्ष्य है। इसमें श्रीमद्भागवत पुराण उपनिषद पुराण और वेदांत सूत्रों से संदर्भ लेकर भक्ति तत्त्व की स्थापना की गई है जो श्री चैतन्य महाप्रभु की शिक्षाओं का दार्शनिक आधार बनता है।
यह संस्करण परंपरागत विद्वान श्री हरिदास शास्त्री द्वारा संपादित और प्रस्तुत किया गया है जिससे यह ग्रंथ शास्त्रीय प्रमाणिकता और पाठ की शुद्धता के साथ उपलब्ध होता है। यह पुस्तक संस्कृत भाषा में है और गंभीर साधकों विद्वानों और शोधकर्ताओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।
जो साधक भक्ति के विज्ञान को गहराई से समझना चाहते हैं जो गौड़ीय वैष्णव सिद्धांत का अध्ययन करना चाहते हैं और जो श्रीमद्भागवत की तात्त्विक व्याख्या में रुचि रखते हैं उनके लिए यह ग्रंथ अनिवार्य है।
यह पुस्तक आध्यात्मिक पुस्तकालयों शोध संस्थानों वैदिक अध्ययन केंद्रों और व्यक्तिगत साधकों के लिए एक अमूल्य धरोहर है।
लेखक श्रील जीव गोस्वामी, संपादक श्री हरिदास शास्त्री
भाषा संस्कृत प्रारूप हार्डकवर
पृष्ठ संख्या 681





















