श्रीमद्भगवतम्: Srimad Bhagavatam Tenth Canto (Set of 5 Volumes) Hindi
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श्रीमद्भगवतम् – दशम स्कन्ध (5 खण्डों का सेट)
श्रील भक्तिवेदान्त नारायण गोस्वामी महाराज द्वारा भाष्य सहित
प्रेम-भक्ति की पराकाष्ठा को दर्शाने वाला काव्यमयी ग्रंथ
यह पाँच खण्डों का सुंदर सेट श्रीमद्भागवतम् के दशम स्कन्ध का संपूर्ण प्रस्तुतीकरण है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से लेकर द्वारका लीला तक की अमृतमयी कथाओं को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है। इस संस्करण में श्रील भक्तिवेदान्त नारायण गोस्वामी महाराज द्वारा दी गई रसात्मक टीका, भावपूर्ण हिन्दी अनुवाद और शुद्ध संस्कृत श्लोक सम्मिलित हैं।
Srimad Bhagavatam – Tenth Canto (5 Volume Set)
With Commentary by Srila Bhaktivedanta Narayana Goswami Maharaj
This beautiful five-volume hardcover set presents the complete Tenth Canto of the Srimad Bhagavatam, narrating the divine pastimes of Lord Sri Krishna — from His birth and childhood in Vraja to His Mathura and Dvaraka lilas.
Each volume includes the original Sanskrit verses in Devanagari, heartfelt Hindi translations, and deeply devotional, rasa-filled commentaries by Srila Bhaktivedanta Narayana Goswami Maharaj, revealing the inner moods of raganuga bhakti.
🔆 इस सेट की विशेषताएँ:
देवनागरी में मूल संस्कृत श्लोक
हिन्दी अनुवाद जो सरल और हृदयस्पर्शी है
श्रील नारायण महाराज द्वारा की गई भावगर्भित टीकाएँ, जो रागानुगा भक्ति की गहराइयों को प्रकट करती हैं
व्रज की लीलाओं, गोचारण, रास, मथुरा गमन, कंस वध, द्वारका जीवन आदि का क्रमबद्ध वर्णन
सुंदर चित्रयुक्त आवरण और उच्च गुणवत्ता की हार्डकवर बाइंडिंग
📖 पाँच खण्डों का संक्षिप्त विवरण:
1. प्रथम खण्ड (अध्याय 1–13): श्रीकृष्ण जन्म, पूतना वध, वत्सासुर, बकासुर
2. द्वितीय खण्ड (अध्याय 14–33): गोवर्धन लीला, रासपंचाध्यायी
3. तृतीय खण्ड (अध्याय 34–53): मथुरा गमन, कंस वध, उज्जैन यात्रा
4. चतुर्थ खण्ड (अध्याय 54–77): रुक्मिणी विवाह, नारद संवाद, स्यमंतक मणि
5. पंचम खण्ड (अध्याय 78–90): द्वारका लीला, यदुवंश, महाभारत की झलकियाँ
लेखक / टिप्पणीकार: श्रील भक्तिवेदान्त नारायण गोस्वामी महाराज
भाषा: संस्कृत मूलपाठ + हिन्दी भावार्थ व टिप्पणी
आकार: 16×23 सेमी प्रति खण्ड
बाइंडिंग: हार्डकवर (5 वॉल्यूम सेट)
इस विशाल ग्रन्थमें भ्रम-प्रमादवशतः कुछ त्रुटि विच्युतियोंका रह जाना अस्वाभाविक नहीं है। सुधी पाठकों द्वारा उनका संशोधनपूर्वक पाठ करनेसे हमलोग आनन्दित होंगे।

















